Om Shanti
Om Shanti
कम बोलो, धीरे बोलो, मीठा बोलो            सोच के बोलो, समझ के बोलो, सत्य बोलो            स्वमान में रहो, सम्मान दो             निमित्त बनो, निर्मान बनो, निर्मल बोलो             निराकारी, निर्विकारी, निरहंकारी बनो      शुभ सोचो, शुभ बोलो, शुभ करो, शुभ संकल्प रखो          न दुःख दो , न दुःख लो          शुक्रिया बाबा शुक्रिया, आपका लाख लाख पद्मगुना शुक्रिया !!! 

Points to Churn: August 30, 2013

Swamaan / Sankalp / Slogan: Swaroop Bano
August 30, 2013
हम आत्माएँ, दिल सच्ची, दिमाग़ ठंडा, स्वभाव सरल रख, बाप को प्रत्यक्ष करनेकी नंबर वन सेवा करने वाले, दिलाराम बाप के दुआओं के पात्र हैं...
We, the souls, do the number one service of revealing the Father with a true heart, cool mind and an easy nature and become worthy of special blessings from the Dilaram Father, the Comforter of Hearts...
Hum atmaayen, dil sachchi, dimaag thanda, swabhav saral rakh baap ko pratyaksh karneki nambar van seva karne wale, dilaaram baap ke duaon ke paatr hain...
Om Shanti Divine Angels!!!
Points to Churn: August 30, 2013
Points of Self Respect:
Slogan: Only those who are honest in their hearts and heads are worthy of the love of the Father and the family.
Whatever actions others see us perform, they will do the same... By being generous hearted in service, by using the right methods to attain success, we, the big hearted souls, are the samples and examples of making the impossible tasks possible... by belonging to God, by following the Godly directions, and by making effort, we attain a high status...we are free of anger, free of attachment and free of greed, and interact with each other like milk and sugar ...we do service without being told, with a true heart, cool mind and an easy nature...we follow orders, are obedient, faithful, trustworthy, and very interested and enthusiastic about doing service...
By using every second, every breath and every thought in a worthwhile way, by serving with good wishes and pure feelings, with zeal and enthusiasm, with our head and our heart, we become the most elevated servers...we make ourselves and others move forward with constant zeal and enthusiasm...we are the true servers who move forward in service in all four directions, attain success in service with our spirituality and accumulate the instant fruit of service...
We do true service with love, service with everyone’s blessings, with benevolent feelings, and do the number one service of revealing the Father through our faces and behaviour...we receive service from matter with the depths of the heart and with a lot of love...
We, the children with an honest heart, please the Lord...we remember the Dilwala Father (One who has won our heart) with our heart, easily become the point form and become worthy of special blessings from the Dilaram Father, the Comforter of Hearts... with the power of truth and by pleasing the Lord, our every thought, word and deed becomes accurate, and we become raazyukt (ones who understand all secrets), yuktiyukt ( ones who are tactful) and yogyukt (ones who are accurate in yoga)....
शान्ति दिव्य फरिश्ते!!!

विचार सागर मंथन:August 30, 2013
बाबा की महिमा : परमपिता परमात्मा... पतित-पावन...रहमदिल... लिबेरटर... गाइड... खिवैया...बागवान... वर्ल्ड आलमाईटी अथॉरिटी... रचयिता...ऊँच ते ऊँच... क्रियेटर... डायरेक्टर... मुख्य एक्टर... धोबी...सुनार...बैरिस्टर...
ज्ञान : बाप बच्चों को बैठ परिचय देते हैं l मैं बच्चों के सामने ही प्रत्यक्ष हूँ l मैं परमात्मा परमधाम का रहने वाला हूँ l मैं पुनर्जन्म में नहीं आता हूँ, तुम पुनर्जन्म में आते हो l
कहते हैं ज्ञान, भक्ति, वैराग्य l वैराग्य दो प्रकार का होता है l तो सन्यासी का है हद का वैराग्य, तुम्हारा है बेहद का l तुम्हे बेहद का बाप वैराग्य दिलाते हैं l
बाप कहते हैं यह ज्ञान प्रायः लोप हो जाता है l पहले-पहले भक्ति भी शुरू होती है एक बाप की अव्यभिचारी भक्ति l
अभी तुम ब्राह्मण हो फिर ब्राह्मण से देवता,क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र वर्णों में आयेंगे – यह ड्रामा अनादि बना हुआ है l बाजोली खेली जाती है ना l सिवाय एक बाप के और कोई मुक्ति-जीवन्मुक्ति दे नहीं सकता l
गीता मैं तो है भगवानुवाच l गीता भगवान् ने सुनाई थी l बाप कहते हैं मैं इन शास्त्रों से नहीं मिलता हूँ, जब भक्ति पूरी होती है तब मैं आता हूँ l ज्ञान है दिन, भक्ति है रात l ब्रह्मा से ब्राह्मण पैदा होते हैं l
बाप बैरिस्टर भी है l तुमको 5विकारों की जेल से छुडाते हैं, लिबरेट करते हैं l तुम रावण की जेल में हो, जेल से छुड़ाने लिए वकालत सिखलाते हैं कि अपने को कैसे छुडाओl तुम राजधानी ले लेंगे फिर मैं वानप्रस्थ में बैठ जाऊंगा l
सन्यासी को भी तुम शक्तियों ने बाण मारे हैंl अगर स्थूल बाणों की बात होती तो ऐसे थोड़े ही कहते कि परमपिता ने बाण मरवाये हैंl यह है ज्ञान के बाण l
तुम हो ब्रह्माकुमारियां, वह फिर ब्रह्म कुमारियाँ कह देते हैं l कहते हैं ब्रह्म ही भगवान् है l बाप कहते हैं यह तुम्हारा भ्रम है l
तुम मूलवतन, सूक्ष्मवतन,स स्थूलवतन, सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त को जानकार नॉलेजफुल बन गये हो l चक्र को भी जान लिया है चक्रवर्ती राजा बनने के लिए l
योग : गृहस्थ व्यवहार में रहते सिर्फ बुद्धि से भूलना है l यह तो पुराना शरीर है, अब 84 जन्म पुरे हुए l देह सहित देह के सब धर्मों, सर्व सम्बन्धो को भूलना है l अपने को देहि समझना है l
अव्यभिचारी याद रहे और किसकी याद ना आये, इसमें मेहनत बहुत करनी है l
पिछाड़ी में अचल-अडोल बनेंगे l
यह है ईश्वरीय जन्म l बाप कहते हैं सिर्फ एक मुझे याद करो इसमें ही मेहनत है l
धारणा : तुम बच्चे भी बाप के साथ-साथ सबको शांतिधाम और सुखधाम का रास्ता बताने के लिए लाइट हाउस बनो l तुम्हारी एक आँख में मुक्ति और दूसरी आँख में जीवनमुक्ति हो l बुद्धि कहती है हम लाइट हाउस हैं l
वास्तव में तुम सब महावीर-महाविरनियाँ हो जो माया पर जीत पाते हो l श्रीमत पर पुरुषार्थ करते हो lतुमको अपनी अवस्था ऐसी रखनी है, जैसे अंगद को रावण हिला नहीं सका l काम महाशत्रु को जीतो एक बाप की अव्यभिचारी याद से अपनी अवस्था एकरस अचल-अडोल बनानी है l महावीर बनना है l
सेवा : तुम हो मनुष्यों को रास्ता दिखाने वाले लाइट हाउस l लाइट हाउस बन सबको मुक्ति-जीवन्मुक्ति की राह दिखानी है l बाप से अच्छी रीति पढ़कर औरों को पढ़ाना है l भारत को स्वर्ग बनाना हैं|
स्वमान: पाण्डव सेना... बेपरवाह बादशाह ... स्वर्ग के मालिक... महावीर-
महाविरनियाँ... विश्व के मालिक...सिकीलधे बच्चे... सालिग्रामों...राजऋषि... अखण्ड
सेवाधारी...
स्लोगन:- जो दिल और दिमाग से ऑनेस्ट हैं, वही बाप वा परिवार के प्यार के पात्र हैं l
जैसे कर्म हम करेंगे, हमे देख और करेंगे... हम बड़ी दिल वाली आत्माएँ, सेवा में असंभव कार्य को संभव करनेवाली, विधि से सिद्धि पानेवाली, ईश्वरकी बनकर, ईश्वर की मत पर चलनेवाली पुरुषार्थ कर ऊँच पद पानेवाली, फ्राकदिल सैम्पल और एक्साम्पल बन, आपस में क्षिरखण्ड बन रहनेवाली, निर्क्रोधि, निर्मोही, निर्लोभी हैं... दिल सच्ची, दिमाग़ ठंडा, स्वभाव सरल रख बिगर कहे सर्विस करनेवाली, आज्ञाकारी, वफ़ादार, फरमानबरदार और ईमानदार सर्विस की शौकीन हैं...
हर सेकण्ड, हर श्वास, हर संकल्प सफल कर,शुभ भावना और शुभ कामना, उमंग और उत्साह, दिल और दिमाग़ से सर्विस करनेवाले, सर्वोत्तम सेवाधारी हैं... सदा उमाग और उत्साह के द्वारा स्वयं को और औरों को आगे बढ़ानेवाले, चारों और की सेवा में आगे बढ़नेवाले, अपनी रूहानियत से सेवा में सफलता प्राप्त कर सेवा का प्रत्यक्ष फल जमा करनेवाले, सच्चे सेवाधारी हैं...
सच्ची सेवा, पयारसे सेवा, सभी की दुआओं से सेवा, कल्याण के भावना की सेवा, चहेरे और चलन से बाप को प्रत्यक्ष करनेकी नंबर वन सेवा करने वाले, प्रकृति की दिल व जान, सिक व प्रेम सेवा के पात्र हैं...
साहिब को राज़ी करनेवाले, सच्चे दिलवाले बच्चे हैं... दिल से दिलवाले बाप को याद कर सहज ही बिंदू बन दिलाराम बाप के दुआओं के पात्र हैं...भगवान को राज़ी कर और सच्चाई की शक्ति से हर संकल्प, बोल और कर्म यथार्थ करनेवाले, राज़ युक्त, युक्ति युक्त और योग युक्त हैं...
 
Om Shanti divya farishte !!!
Vichaar Sagar Manthan: August 30, 2013
Swamaan aur Atma Abhyas
Slogan: Jo dil aur dimaag se honest hain, vahi baap va parivar ke pyar ke paatr hain.
Jaise karm hum karenge, hame dekh aur karenge... Hum badi dil wali atmaayen, seva men asambhav kaarya ko sambhav karnewali, vidhi se siddhi paanewali, ishawar ki bankar, ishwar ki mat par chalnewali purushaarth kar oonch pad paanewali, fraakdil saimpal aur exampal ban, aapas men kshirkhand ban rahnewali, nirkrodhi, nirmohi, nir lobhi hain... dil sachchi, dimaag thanda, swabhav saral rakh bigar kahe sarvis karnewali, agyaakaari, wafaadar, farmaan bar daar aur imaandaar sarvis ki shaukin hain...
har sekand, har shwaas, har sankalp safal kar, shubh bhavna aur shubh kaamna, umang aur utsaah, dil aur dimaag se sarvis karnewale, sarvottam sevadhaari hain... sada umag aur utsaah ke dwaara swayam ko aur auron ko aage badhaanewale, chaaron aur ke seva men aage badhnewale, apni ruhaaniyat se seva men safalta praapt kar seva ka pratyaksh fal jama karnewale, sachche seva dhaari hain...
sachchi seva, pyarse seva, sabhi ki duaon se seva, kalyaan ke bhaavna ki seva, chehere aur chalan se baap ko pratyaksh karneki nambar van seva karne wale, prakriti ki dil v jaan, sik v prem seva ke paatr hain...
sahib ko raazi karnewale, sachche dilwale bachche hain...dil se dilwale baap ko yaad kar sahaj hi bindoo ban dilaaram baap ke duaon ke paatr hain...bhagwan ko raazi kar aur sachchai ki shakti se har sankalp, bol aur karm yathaarth karnewale, raazyukt, yuktiyukt and yogyukt hain...

Video of Murli Essence:
http://www.youtube.com/watch?v=jmBNjVmWdQQ
Song: Kisne ye sab khel rachaya- किसनेयह सब खेलरचाया...... Who created this play
http://www.youtube.com/watch?v=LpgQm6UXEAo&feature=youtu.be
30-08-2013:
Essence: Sweet children, only by having unadulterated remembrance will your stage become unshakeable and immovable. Make such effort that you remember nothing but the one Father.

Question: What service does Shiv Baba do, and what is that you children have to do?

Answer: At the confluence age, Shiv Baba removes all souls from the graveyard, that is, He does the service of purifying souls who, having come into body consciousness, have become impure. You children have to become lighthouses and, along with the Father, show everyone the way to the land of peace and land of happiness. Let there be liberation in one eye and liberation-in-life in the other.

Song: Who created this play and then hid Himself away?
Essence for dharna:
1. Study well with the Father and teach others. Become a lighthouse and show everyone the path to liberation and liberation-in-life.
2. Stay in unadulterated remembrance of the one Father, and thereby create an unshakeable and immovable stage for yourself. Become a great warrior.
Blessing: May you be a constant server and by remaining free from all wasteful spinning, do service that is free from obstacles.

Everyone does service, but there is great importance of those who remain free from obstacles while doing service. No type of obstacle should come in the midst of service. If there is any obstacle of the atmosphere, the company or laziness, then service is harmed. A constant server can never be caught up in any type of obstacle. There should not be even the slightest thought of an obstacle. Remain free from all wasteful spinning and you will then be said to be a successful and constant server.

Slogan: Only those who are honest in their hearts and heads are worthy of the love of the Father and the family.
30-08-2013:

मुरली सार:-``मीठे बच्चे - अव्यभिचारी याद से ही तुम्हारी अवस्था अचल-अडोल बनेगी, पुरूषार्थ करो एक बाप के सिवाए दूसरा कुछ भी याद आये''

प्रश्न:-
शिवबाबा कौन-सी सार्विस करते हैं और तुम बच्चों को क्या करना है?

उत्तर:-
संगम पर शिवबाबा सभी आत्माओं को कब्र से निकालते हैं अर्थात् आत्मायें जो देह अभिमान में आकर पतित बन गई हैं उन्हें पतित से पावन बनाने की सार्विस करते हैं। तुम बच्चे भी बाप के साथ-साथ सबको शान्तिधाम और सुखधाम का रास्ता बताने के लिए लाइट हाउस बनो। तुम्हारी एक आंख में मुक्ति और दूसरी आंख में जीवनमुक्ति हो।

गीत:-
किसने यह सब खेल रचाया........

धारणा
के लिए मुख्य सार:- 1) बाप से अच्छी रीति पढ़कर औरों को पढ़ाना है। लाइट हाऊस बन सबको मुक्ति-जीवनमुक्ति की राह दिखानी है।
2)
एक बाप की अव्यभिचारी याद से अपनी अवस्था एकरस अचल-अडोल बनानी है। महावीर बनना है।

वरदान:-
सब व्यर्थ चक्रों से मुक्त रह निर्विघ्न सेवा करने वाले अखण्ड सेवाधारी भव

सेवा
तो सब करते हैं लेकिन जो सेवा करते भी सदा निर्विघ्न रहते हैं, उसका बहुत महत्व है। सेवा के बीच में कोई भी प्रकार का विघ्न आये। वायुमण्डल का, संग का, आलस्य का....यदि कोई भी विघ्न आया तो सेवा खण्डित हो गई। अखण्ड सेवाधारी कभी किसी विघ्न में नहीं सकते। जरा संकल्प मात्र भी विघ्न हो। सब व्यर्थ चक्रों से मुक्त रहो तब सफल और अखण्ड सेवाधारी कहेंगे।

स्लोगन:-
जो दिल और दिमाग से ऑनेस्ट हैं, वही बाप वा परिवार के प्यार के पात्र हैं।
 

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